राजस्थान सरकार द्वारा बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाडो प्रोत्साहन योजना 2026 को लागू किया गया है। यह योजना राज्य में बालिका जन्म को बढ़ावा देने और उनके संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत बेटियों को जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा पूरी होने तक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।
योजना की शुरुआत और उद्देश्य क्या है
लाडो प्रोत्साहन योजना की शुरुआत 1 अगस्त 2024 से की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है। सरकार का लक्ष्य है कि बालिकाओं के जन्म को सम्मान मिले, बाल विवाह जैसी समस्याओं को कम किया जाए और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े। इस योजना के माध्यम से सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
योजना के तहत मिलने वाली कुल राशि
इस योजना के अंतर्गत अब बेटियों को कुल ₹1,50,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। पहले यह राशि कम थी, लेकिन 2025 में इसे बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दिया गया है। यह राशि एक साथ नहीं दी जाती, बल्कि बेटी के जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु तक अलग-अलग चरणों में दी जाती है।
7 किस्तों में मिलता है पूरा लाभ
लाडो प्रोत्साहन योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें मिलने वाली राशि 7 अलग-अलग किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। शुरुआती किस्तें माता-पिता या अभिभावक के खाते में आती हैं, जबकि अंतिम किस्त बेटी के 21 वर्ष पूरे होने पर उसके खाते में दी जाती है। इससे बेटी की पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।
किन बेटियों को मिलेगा योजना का लाभ
इस योजना का लाभ उन बेटियों को दिया जाता है जिनका जन्म 1 अगस्त 2024 या उसके बाद हुआ है और जिनका जन्म सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में हुआ हो। साथ ही, परिवार का राजस्थान का मूल निवासी होना जरूरी है। सरकार इस योजना के जरिए खासतौर पर उन परिवारों को सहयोग देना चाहती है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
आवेदन प्रक्रिया
इस योजना के लिए अलग से लंबी आवेदन प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती है। बालिका के जन्म के समय ही संबंधित स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंजीकरण किया जाता है और आगे की किस्तें DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जाती हैं। कई मामलों में पहली किस्त के लिए अलग आवेदन की आवश्यकता भी नहीं होती, जिससे प्रक्रिया आसान बनती है।
